दोस्त

दोस्त

हम जो हर रोज़ तुम्हारे सामने यूँ खड़े होकर तुम्हें निहारा करते हैं, तो लगता है कि कितने मासूम हो जैसे दुनिया की खबर ही नहीं है तुम्हे कोई। बस अपनी धुन में गाते गुनगुनाते हुए लगे रहते हो अपनी खुशबू महकाने। खुद मिलकर सब में तुम सबको अपने रंग में रंग जो लेते हो, जैसे चाहे वैसे उसे परख लेते हो, यूँ तो लगता है कुछ वक्त,तुम्हें भी उबाल खाने में पर अपनी आदतों से भी तुम बाज़ कब आते हो।

मैंने देखा है तुम्हें रंग बदलते हुए कैसे तुम लोगों के हिसाब से बदल जाते हो, पर ये तरीका कुछ सही नहीं लगा मुझे। जब मिलते हो घर में तो दुनिया भर की सभी तहजीब के साथ और जो मिलते हो दोस्तो के साथ तो थड़ी पे ठहाके लगाते हुए। कभी लगते हो कि समझदारी भी तुमसे ही बातें करना सीखी है, तो कभी झल्ले से बनकर यूँ ही बिन तथ्यों की बातों में गुम हो जाया करते हो, तो कहीं फ्यूचर के सपने तुम्हारे साथ बैठ के देखे जाते हैं अब तुम ही बताओ कि इतने रंगों में जो रंग जाते हो आदत है तुम्हारी या सिर्फ मोहब्बत है लोगों से?

अच्छा! एक बात तो है तुम हो बड़े ही खतरनाक, आदत तुम्हारी किसी लत से कम नहीं है, लग जाए तो भीषण गर्मी में भी तुम चाहिए हो, बारिश तुम्हारे बिना अधूरी है और सर्द रातों का तो कहना ही क्या, उन रातों में तो तुम किसी महबूब से कम नहीँ जब मिलते हो तो सारा दर्द चैन में बदल जाता है और महफ़िल में रौनक आ जाती है, यूँ तो तुम भी कम नहीं हो; इश्क़ तुम्हारे अंदर भी है बस तुम्हारे साथ का अंदाज़ अलग होता है।

कभी कभी सोचते हैं कि क्यूँ न तुमसे पूछा जाए और जाना जाए तुम्हारे बारे मे भी- कि कहो तुम ऐसे क्यूँ हो ? फिर जब तुम सामने आते हो तो सब भूल जाया करते हैं, लगता है कि अब क्या ही पूछें तुम तो अपने हो और तुम्हें तो बस एहसास कर के हम बता दें कि तुम कैसे हो और क्या हो। शक्कर की मिठास तुम में, मसालों का तीखापन तुम में, कभी कड़क तो कभी आराम देते हो, अब और क्या कहा जाए तुमसे और कितनी तारीफ की जाए तुम्हारी!

अब चलिये आ भी जाइये ज़नाब, इतना उबाल खा ही लिए हो तो कुछ खातिरदारी भी कर दीजिए, इस मौसम में बैठकर रोज़ की ही तरह कुछ गुफ़्तगू करते हैं तुमसे, सिर्फ तुमसे। बदल रहे हैं पहर, दिन और हालात, मग़रूर हैं अपनी दुनिया में लोग और बदलते भी जाएंगे, पर तुम ऐसे ही रमते रहोगे दिल में सबके साथ एक समान; हमारे भी, औरों के भी, कभी हमदर्द बनके तो कभी जान-ऐ-महफ़िल बनके। तन्हाइयों में भी और शहनाइयों में भी।

सच में!

दोस्त तुम सा नहीं कोई! – “एक चाय”…

क्या करें तुमसे प्यार ही इतना है
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Sunanda Jadaun

A Literature lover, Teacher, Researcher, Writer, Poet and Artist are the words that describe me the best. I love to share my thoughts and connect people with my Merakiness.

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