“सुशांत”

“सुशांत”

यूँ तो रहा वो हरदम शिखर पर,
पर मेहनत जमीं से ही लगाया होगा।
लड़खड़ा कर सम्हाल लिया वो खुद को,
जब माँ को बचपन में उसने गंवाया होगा।
सपने हज़ार संजोए वो चकाचौंध के,
सपनो के शहर जब आया होगा।

हुआ तो होगा वो भी बेचैन कुछ पल,
फिर भी अपनी हिम्मत वो ना हारा होगा।
जब भी वो उस भीड़ में जाता होगा,
शायद खुद को अलग-थलग पाता होगा।
खड़ा होगा एक कोने में खुद का हुनर लेकर,
फिर भी भरी महफ़िल में न किसी ने सराहा होगा।

देखा होगा जब असल में, फ़िल्मी पर्दे के पीछे का शूल,
क्या खूब ही उसने नया तज़ुर्बा पाया होगा।
हर एक पल कुछ नया करने की चाह में,
ना पिछड़ापन फिर उसे गंवारा होगा।
जरा सी रोशनी में ही जगमगा गया यहाँ,
चाँद को उसने अगला निशाना बनाया होगा।

बाँध रहा होगा अंतिम छलांग को फँदा जब वो
उसे कोई तो अपना उस वक़्त याद आया होगा।
कहाँ फिजिक्स, कहाँ एलियन, कहाँ साइंस की थ्योरी,
खींच लाई यहाँ मौत की डोरी, ये भी उसने सोचा होगा।
पिता बहन और अपनों ने कहा ‘ज़िद्दी’ था वो,
इसीलिए ही तो जो चाहा कर पाया होगा।

अवसाद और अकेलेपन से भारी होकर,
माँ की गोद में छलकाया अपना हर आँसू होगा।
अदाकार की अदायगी ही बस रह गयी यहाँ ,
उसने भी क्या क्या किरदार निभाया होगा।
एक ‘मानव’ से शुरु नाटक को, जिंदगी के पर्दे पर ऐसे,
चिर अनंत तक ‘सु-शांत’ कर पाया होगा।
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Sunanda Jadaun

A Literature lover, Teacher, Researcher, Writer, Poet and Artist are the words that describe me the best. I love to share my thoughts and connect people with my Merakiness.

This Post Has 8 Comments

  1. Charu

    क्या खूब लिखा है…आंख नम है।

    1+
  2. Sunanda Jadaun

    🙏😑

    0
  3. अनुराग केशरवानी

    बहुत शानदार शब्दों का उपयोग किया हैं कविता के माध्यम से।

    1+
  4. Sunanda Jadaun

    धन्यवाद 🙏🙏

    0
  5. Priyanka Nair

    avsaad aur akelepan se bhari kuch nahi…

    1+
  6. Era

    Bahut hi acha likha hai aapne

    1+
  7. Sunanda Jadaun

    Dhnywaad 🙏🙏

    0
  8. Sunanda Jadaun

    Sach mein..

    0

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