दोस्त

हम जो हर रोज़ तुम्हारे सामने यूँ खड़े होकर तुम्हें निहारा करते हैं, तो लगता है कि कितने मासूम हो जैसे दुनिया की खबर ही नहीं है तुम्हे कोई। बस…

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ख्वाहिश…

जतन तो बहुत करते हैं ख्वाहिशों को हम लोग हक़ीक़त में बदलने की, पर किसी मर्तबा राह बदल जाती है तो कहीं ख्वाहिश का गला घोटना पड़ता है। ऐसा नहीं…

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वक़्त की बैंक

निग़ाहों के दरवाजे से घुसे हम, चले थे बैंक लूटने। के ज्यों ही दिल के दरवाजे में दस्तक दिए तो देखा बहुत भीड़ है यहाँ, मसला ये नहीं की भीड़…

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