मजदूर और हालात…

मजबूरी में जो निकला घर से कुछ मजदूरी करने,वही रह गया तकता देखो, इन हालातों में मरने। रोज़ी-रोटी ने उसे कितना दूर करवाया हैबचपन के यारों ने आज उसे घर…

Continue Reading मजदूर और हालात…

ये दुनिया…

किसे डराती है दुनिया और किसे सलाम करती है,जो भी करती है अपने मतलब से करती है। नीति को राजनीति सिखाती है,भ्रष्टों को मालाएं पहनाती है,निभाती है हर फ़र्ज़ वो…

Continue Reading ये दुनिया…

रुबरु…

तुम्हारी जुबाँ से अगर मैं सुनूँ,कुछ अनकहे शब्द,जो निकलने को आतुर दिखते हैं,लिए कुछ स्वर्णिम स्पंदन,जो बनेंगें आधार और रचेंगे नए आयाम,लिए उनको मैं सपने फिर बुनूँ,सपनों को हक़ीक़त में…

Continue Reading रुबरु…