रुबरु…

तुम्हारी जुबाँ से अगर मैं सुनूँ,कुछ अनकहे शब्द,जो निकलने को आतुर दिखते हैं,लिए कुछ स्वर्णिम स्पंदन,जो बनेंगें आधार और रचेंगे नए आयाम,लिए उनको मैं सपने फिर बुनूँ,सपनों को हक़ीक़त में…

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एक साथ

"क्या तुम मेरे बिना एक कदम भी चल पाओगे ? बड़े आये अकेले सफर तय करने वाले, अकेले रह नहीं सकते और पीछा छुड़ाने की बात करते हो।" अब अपनी…

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वक़्त की बैंक

निग़ाहों के दरवाजे से घुसे हम, चले थे बैंक लूटने। के ज्यों ही दिल के दरवाजे में दस्तक दिए तो देखा बहुत भीड़ है यहाँ, मसला ये नहीं की भीड़…

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