ये दुनिया…

किसे डराती है दुनिया और किसे सलाम करती है,जो भी करती है अपने मतलब से करती है। नीति को राजनीति सिखाती है,भ्रष्टों को मालाएं पहनाती है,निभाती है हर फ़र्ज़ वो…

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रुबरु…

तुम्हारी जुबाँ से अगर मैं सुनूँ,कुछ अनकहे शब्द,जो निकलने को आतुर दिखते हैं,लिए कुछ स्वर्णिम स्पंदन,जो बनेंगें आधार और रचेंगे नए आयाम,लिए उनको मैं सपने फिर बुनूँ,सपनों को हक़ीक़त में…

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