“सुशांत”

यूँ तो रहा वो हरदम शिखर पर,
पर मेहनत जमीं से ही लगाया होगा।
लड़खड़ा कर सम्हाल लिया वो खुद को,
जब माँ को बचपन में उसने गंवाया होगा।
सपने हज़ार संजोए वो चकाचौंध के,
सपनो के शहर जब आया होगा।

(more…)

26+

Continue Reading “सुशांत”

मजदूर और हालात…

मजबूरी में जो निकला घर से कुछ मजदूरी करने,वही रह गया तकता देखो, इन हालातों में मरने। रोज़ी-रोटी ने उसे कितना दूर करवाया हैबचपन के यारों ने आज उसे घर…

Continue Reading मजदूर और हालात…