रुबरु…

तुम्हारी जुबाँ से अगर मैं सुनूँ,कुछ अनकहे शब्द,जो निकलने को आतुर दिखते हैं,लिए कुछ स्वर्णिम स्पंदन,जो बनेंगें आधार और रचेंगे नए आयाम,लिए उनको मैं सपने फिर बुनूँ,सपनों को हक़ीक़त में…

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भौतिकवाद- सत्य या भ्रम

'भौतिकवाद' ये शब्द कहने को तो अपने आप में ही बड़ा सार्थक है, जिसकी परिभाषा तो कहती है कि पँच-भूतों से मिलकर बने इस संसार को ही सत्य और वास्तविक…

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कोरोना…!! क्यों रोना..??

जैसा कि आप सब को विदित हो ही चुका होगा कि आज हम किस बारे में चर्चा करने जा रहें हैं लेकिन यहाँ मैं आप सभी को एक बात स्पष्ट…

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